स्वामी विवेकानंद के संदर्भ में भगवदगीता के कर्मयोग का सामाजिक अनुप्रयोग

Authors

  • लंबोदर कुमार Author Author

Keywords:

स्वामी तववके ानन्द, र्गवदगीिा, कमया ोग, योग, लोकसांग्रह और अनासति योग

Abstract

कमया ोग का सामातजक सांदशे तनस्वार्था कमाके माध्यम सेसमाज मेंपररविान लानेमेंमहत्वपूणा र्तूमका तनर्ािा है। इस शोधपत्र का मलू सांदशे यह दशााना हैतक र्गवदगीिा केकमया ोग के सामातजक अनप्रुयोग सामातजक और साांस्कृतिक क्षेत्र मेंसवांगीण तवकास और प्रगति को प्रर्ावी ढांग सेआगेिढा सकिेहैं। लेतकन इसके तलए उन कमायोतगयों के उत्र्थान की व्याख्या की आव्यकिा है जो स्वार्था या पाररवाररक लार् के तवचारों से नहीं ितल्क सर्ी के कल्याण की इच्छा से प्रेररि होिे हैं। गीिा मेंआधतुनक र्ारि के सामने मौजदू सामातजक और राजनीतिक गतिरोध का समाधान खोजनेकेतलए एक िह ि ही महत्वपणूासांदशे हैऔर उस सांदशे को सांक्षेप में'लोकसांग्रह' के रूप में कहा जा सकिा हैतजसका शातददक अर्थाहैदतुनया के सार्थ जड़ुाव और अतधक व्यापक रूप सेलोगों की उस समदुाय की ओर सेतवशषे रूप सेस्वार्थी काया(तनष्काम कम)ा करनेकी इच्छा तजसमेंवेखदु को पािेहैं। यह एक योग या आध्यातत्मक अनशुासन का एक िरीका है। अििः कमायोग के अनसुार, व्यति को आसति रतहि होकर िर्था ईिर के प्रति समपाण की र्ावना से प्रेररि होकर कमा करना चातहए । 

Author Biography

  • लंबोदर कुमार, Author

    Assistant Professor

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Published

2025-03-13

How to Cite

स्वामी विवेकानंद के संदर्भ में भगवदगीता के कर्मयोग का सामाजिक अनुप्रयोग. (2025). Sanatanodaya, 1(1), 133-139. https://sanatanodaya.com/index.php/dj/article/view/54

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